देवर के साथ मज़े लिए

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Devar ke sath maje liye (देवर के साथ मज़े लिए) मेरी उम्र 29 वर्ष है, मेरा नाम पूनम है। एक साल पहले मेरे पति की मृत्यु हो गई, इसलिए चादर ओढ़ाई की रस्म के मुताबिक मेरी शादी मेरे छोटे देवर रोहित से कर दी गई,

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जो कि 18 साल का था। उसकी भी शादी तो हो चुकी थी बिमला (16 वर्ष) से, लेकिन बिमला को विदा होकर 3 साल बाद आना था, क्योंकि रोहित की पढ़ाई चल रही थी। खानदान में वही एक पढ़ाई में तेज था और इंजीनियर बनने का लक्ष्य था।

ससुरजी के पास बड़ी ज़ायदाद थी, रोहित सीधा-सादा और भोला-सा, दुबला-पतला, डरपोक टाइप का लड़का था, ससुरजी से भी डरता था। मैं देखने में भोली-सीधी लेकिन हटी-कटी और लंबी थी, ससुराल में सबकी बात भी मानती और सेवा भी करती, गाँव में पर्दा भी रखना पड़ता है। कभी किसी को शिकायत का मौका नहीं दिया था।

रोहित को शहर आना था पढ़ाई के लिए और हमारा एक 2 रूम का फ्लैट भी
था, ससुरजी ने विचार करके मुझे साथ जाने को कहा ताकि मैं उसके
खाने-पीने का ख्याल रख सकूं, सास ने अकेले में कह दिया था कि
ससुर और वो दोनों ही नहीं चाहते कि 3 साल से पहले, जब तक रोहित पूरी
तरह से समझदार और पढ़ाई का टारगेट पूरा ना कर ले, तब तक उसको
शादीशुदा जिंदगी में डालना ठीक नहीं होगा,

इसलिए रोहित को कुंवारा ही रहना है, वैसे भी उसकी शक्ल और भोलेपन से लगता था कि वह सेक्स के बारे में अनाड़ी ही होगा। मुझे भी शादी तो करनी पड़ी लेकिन मैं भी उसे दिल से पति की जगह देवर ही मान रही थी।

शहर आने के बाद यहाँ घूँघट पर्दा तो रखना था नहीं, अकेले को डर लगता इसलिए रोहित को कहा कि उसके साथ ही सोना है, उसने पिताजी के डर और शर्म से ना-नुकुर की, मैंने रोनी सी सूरत बना ली, और बोली, मुझे गाँव ही छोड़ दो, फिर बात हुई कि, ये बात किसी को बतानी ही नहीं है, तब रोहित ने कहा, भाभी प्रॉब्लम ये नहीं, बल्कि, रात में मेरी टांग और हाथ कब हिलते हैं मुझे पता ही नहीं लगता,

और आपके साथ सोने से आपकी ही नींद खराब होगी, मैंने हँस के कहा मैं भी घोड़े बेच के ही सोती हूँ। उसकी इस मासूमियत पर मुझे बड़ा प्यार सा आया। मैं टीवी देखने लगी बेड पर, वह लेट कर पढ़ते हुए ही सो गया, मैंने उसकी किताब रखी और बगल में लेट कर उसके बालों को सहलाया दुलार से, तभी वह करवट लिया और उसका हाथ सीधे मेरी कमर पर आ गया, नींद में ही था।

मैं सीधी हो के लेट गई तो उसका हाथ पेट
पे था, उसकी पतली और लंबी उंगलियाँ अच्छी लग रही थीं, अगले 2-3 दिन
तक रोज ही वो पेट पे हाथ रख के सोता रहा, फिर, उसकी उंगलियाँ पेट पे
घूमती कई बार रुक-रुक के, फिर, एक दिन मुझे नींद नहीं आई थी लेकिन
आँख बंद थी, वो जागा हुआ था, उसने पेट पे हाथ रख दिया, और
उंगलियाँ भी घुमा रहा था, तब समझ गई कि उसको मेरे पेट पे
जानबूझकर हाथ रखना होता है,

पेट गोरा और दूध के रंग जैसा नरम था, वह उंगलियों से धीरे-धीरे पेट की स्किन को साड़ी से ऊपर की तरफ खींच रहा था, रुक-रुक कर ताकि मैं जाग ना जाऊं, मुझे भी अच्छा लग रहा था। 3-4 मिनट की कोशिश से साड़ी नाभि से नीचे खिसक गई, और नाभि के ऊपर-ऊपर हाथ घुमाता रहा वह।

मैं समझ गई कि इसको भी इसके भैया की तरह मेरी नाभि पसंद है। अगले दिन जानबूझकर साड़ी मैंने नीचे पहनी और पल्लू से ढकी रही दिन भर, शाम को अब कोई आने वाला था नहीं, तब पल्लू को कमर में खोंस लिया, उसकी नजर बार-बार नाभि पर अटक रही थी, बगल में लेटी तो पूछा, भाभी आपने आज साड़ी नीचे क्यों पहनी है? जवाब दिया कि ये कॉटन साड़ी है, आराम मिलता है इसमें, क्यों अच्छी नहीं लगी?

बोला नहीं नहीं ऐसी बात नहीं बहुत अच्छी लग रही हो, लेकिन आप
पल्लू से अपनी सुंडी को ढक के रखना, कोई देखे मुझे अच्छा नहीं
लगता, मैंने बोला मैं जानती हूँ, तो बदमाशी से पूछा मेरी नज़र
पड़ी तो, हंस के मैं बोली, बेफिकरा रहो, तुम देवर और पति हो
इसलिए मुझे तुमसे कोई फर्क नहीं, तब से अक्सर उसके सामने नाभि खोल
के ही घूमती और वो छुप छुप के निहारता,

रात को नाभि के आसपास उंगलियां घुमाता और नाभि पर ही हथेली रखकर सोता, 2-3 दिन बाद ही उसने नाभि में धीरे से उंगली डाली, और उंगली घुमाना भी शुरू किया, करते-करते ही सो गया, अगले दिन मैंने उससे कहा सुबह उठी तो तुम्हारी उंगली नाभि में थी, वह शर्मा सा गया, बोला सॉरी भाभी, मैं बोली सॉरी की क्या बात है, तुम पति हो और अगर मुझे छू लिया तो सॉरी की क्या बात है? मुझे भी अच्छा ही लगता है।

उसको एक तरह से मैंने लाइसेंस ही दे दिया, तब से वो रात को तो करता ही, दिन में भी कई बार बात करते समय उंगली डाल लेता, 2 दिन बाद ही उसने सुंडी पे किस किया, और मुझे बोला तुम्हारी सुंडी बहुत ही गहरी और बड़ी है, इसका वॉल्यूम निकालना है, मतलब कितना मिली लीटर लिक्विड इसमें आ सकता है, मैंने हँसते हुए पूछ लिया कि क्या कोई इंजीनियरिंग फ़ॉर्मूला है क्या?

बस जानकारी के लिए बोला, मैंने कहा नाप लो, उसने पास में ही पड़ी सॉस की बोतल को नाभि में डाला, ढक्कन से नापकर, और बोला 15 ml क्षमता है। मैंने कहा अब साफ तो करो, बोला उंगली डालने से पेट पर फैल जाएगा, चिपचिपा होगा और मुझे धोना पड़ेगा, मैंने कहा इसको पी जाओ, बर्बाद भी नहीं होगा, वो शुरू हो गया,

और सॉस खत्म होने के बाद भी नाभि को चूसता रहा काफ़ी देर तक। और दोनों हाथ पेट पर घुमाता रहा, अब तो अक्सर ही ऐसा होने लगा, 3-4 दिन बाद दोनों ने वोडका पी, मैं पहले भी पति के साथ 6-7 बार पी चुकी थी, इसलिए मना नहीं किया, और नशे का ज्यादा नाटक करते हुए ज्यादा बक-बक करने लगी,

वह पूछ रहा था कि सभी ने सेक्स के लिए मना किया है, सेक्स होता क्या है? मैंने कहा, “चुदाई” शब्द सुना है? उसने कहा, सुना तो है लेकिन क्या होता है नहीं पता। मैंने नशे का नाटक करते हुए बेशर्मी से कहा कि जब पति अपना लिंग पत्नी के पेशाब वाले रास्ते में डालता है, उसी को चुदाई कहते हैं। तो उसने पूछा, अगर मैं आपकी सुंडी को चूसता हूँ तो वह क्या है? मैंने कहा, वह सिर्फ मस्ती है। तो वह बोला, आपसे मस्ती करने को तो किसी ने मना नहीं किया। मैंने कहा, सही बात है। तब उसने पूछा, अगर मैं आपके स्तनों को छू लूँ तो क्या वह सेक्स होगा?

मैंने कहा नहीं, तुरंत
उसने बूब्स को दबाया, और बोला भाभी आपसे मस्तीका मूड है, प्लीज़
आप अपना ब्लोज़ खोलो, मैंने कहा ये ठीक नहीं होगा, लेकिन वो खोलने
लगा, मैंने नशे का नाटक करते हुए हल्का सा प्रतिरोध किया, उसने
पूरा ही ब्लोज़ और ब्रा खोल दी, दोनों बूब्स को दबाना और चूसना शुरू
किया मेरे ऊपर ही लेट के, मैंने याद दिलाया कि सेक्स के लिए मना किया
गया है, बोला, मस्ती है ये सेक्स नहीं।

मैं चुप हो गई और नज़ारा लेने लगी, तभी पेटीकोट भी उतार दिया, विरोध करने पर बोला, आपके अंदर लंड घुसाऊंगा तब सेक्स माना जाएगा, तो फिर क्यों रोक रही हो?
उसकी बात में दम था, नाभि के नीचे जगह-जगह चूसना शुरू कर दिया, पूरा पेट, नाभि, बूब्स को जगह-जगह से लाल कर दिया चूस-चूस के।

फिर दोनों एक-दूसरे से लिपटे हुए ही सो गए। सुबह उठी तो वह भी अंडरवियर में था और मैं भी केवल पैंटी में, उसकी भी आँख तुरंत ही खुल गई, दोनों ही नाटक करना शुरू कर दिए कि जैसे होश में नहीं थे दोनों ही और ये क्या हो गया। और मैं उठकर भाग गई बाथरूम में।

अगर आपको मेरी कहानी देवर के साथ मज़े लिए अच्छी लगी तो लाइक करें और कमेंट करें। इसके अगले भाग में मैं आपको बताऊंगी कि देवर के साथ मैंने और क्या-क्या किया। तो मिलते हैं आपसे अगले भाग में, तब तक के लिए बाय बाय। यह कहानी आप Original Antarvasnahub वेबसाइट पर पढ़ रहे हैं।

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