Padosan ki chudai
पड़ोसन की चुदाई (Padosan ki chudai) हेलो दोस्तों मेरा नाम मुकेश कुमार है मैं यूपी गाज़ियाबाद से हूँ मैं आपको अपनी मैं पहली चुदाई के बारे में बताना चाहता हूँ।
ज़्यादा समय न लेते हुए मैं सीधे कहानी पर आता हूँ। ये कहानी उन दिनों की है जब मेरी शादी नहीं हुई थी। हमारे मकान में एक फैमिली किराए पर रहने आई। सिर्फ हसबैंड और वाइफ थे। मुस्लिम फैमिली थी। वाइफ का नाम नूर जहाँ था। वो देखने में एकदम सेक्सी फिगर की थी। मैंने जब नूर जहाँ को पहली बार देखा तो उसका दीवाना हो गया। धीरे-धीरे उससे जान-पहचान करने की कोशिश करने लगा।
जब वो काम से फ्री होती तो मेरी Mom के साथ बैठी रहती, मैं उसे देखता रहता। उसके गुलाबी होंठ, जब वो बोलती थी, तो मैं उसके चेहरे को ही देखता रहता। ये बात उसने नोटिस की और वो भी नज़रें चुरा के देखने लगी। ऐसे ही कुछ दिन चला। एक दिन नूरजहाँ अपना काम खत्म करके Mom के साथ बात करने के लिए आई और Mom बाहर गई हुई थी, घर पर मैं अकेला ही था, तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।
हमारे यूज़ ने “आई लव यू” बोल दिया, इतना सुनकर आंटी ही वो शर्मा गई और बोली “मॉम आ जाएगी”। मैंने उसे अपनी बाँहों में कस लिया और उसके गुलाबी होठों को चूम लिया। शर्म से उसके गाल एकदम लाल हो गए और वो अपने कमरे में भाग गई।
अब मेरा मन लगने वाला था। मैं उसके पीछे उसके कमरे में चला गया और उसे अपनी बाहों में कस लिया और उसके होठों को किस करने लगा। कभी मैं उसके होठों को चूसता और कभी वो मेरे होठों को चूसती। तभी अचानक दरवाज़े पर कोई आ गया और मैं जल्दी से उसके कमरे से निकल गया। मैंने दरवाज़ा खोला, मम्मी और पापा आ गए थे। कुछ दिन ऐसे ही निकल गए।
एक दिन उसके पति को अपने गांव जाना पड़ा। उसके पति के जाने के बाद वह मुझसे अकेले में मिलने का इंतजार करने लगी। वह छत पर कपड़े सुखाने के लिए गई। मैं सबकी नजरों से छुपकर छत पर गया। बात की तो उसने कहा, “आज रात 2 बजे मेरे कमरे में आ जाना, मैं दरवाजा खुला रखूंगी।” यह सुनकर तो मेरा बुरा हाल हो गया। मेरा पहला मौका था। इससे पहले मैंने कभी सेक्स नहीं किया था।
मैं बेताबी से रात का इंतज़ार करने लगा। रात का खाना खाकर सब अपने-अपने काम करके सोने चले गए और मैंने फोन में 2 बजे का अलार्म सेट करके सो गया। रात को अलार्म ठीक 2 बजे बजने लगा, मैंने जल्दी से अलार्म को ऑफ किया। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैं कमरे से बाहर आया और सबको चेक किया, कहीं कोई जाग तो नहीं रहा। सब लोग गहरी नींद में थे।
मैं नूरजहाँ के
कमरे की ओर चल दिया। उसके दरवाज़े के पास जाकर इधर-उधर देखा
और उसके दरवाज़े को धकेला तो दरवाज़ा खुल गया और मैं जल्दी से कमरे
में घुस गया। अंदर घुसते ही नूरजहाँ बोली, “कौन है?” मैंने धीरे से कहा, “मैं
हूँ।” तो वो अपने बिस्तर से खड़ी हुई और बोली, “किसी ने तुम्हें देखा तो नहीं?”
मैंने कहा, “नहीं, सब सोए हैं,” और मैंने उसे बाहों में कस लिया और पागलों की तरह
चूमने और चाटने लगा।
अब वो भी खुल के मुझे चाहने लगी और मेरा लंड खड़ा हो गया और लवर से बाहर आने को उतावला हो रहा था। नूरझना ने लंड को अपने हाथ में लिया और प्यार से सहलाने लगी। उसने मेरे लवर को उतारा के एक ओर फेंक दिया। मैं खाली टी-शर्ट में था, फिर उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए और बेड पर लेट गई और बोली, “आ जाओ, करो।” मैं एक ओर खड़ा ये सोच रहा था कि कैसे करते हैं, तो मैंने उसे बोला, “मुझे करना नहीं आता, मैंने कभी नहीं किया,” तो इस पर वो जोर से हँसने लगी और बोली, “तुम्हारी सील मैं तोड़ती हूँ।”
आओ मैं उसके पास जाकर बैठ गया। उसने मेरा हाथ पकड़ के खींचा और बेड पर लिटा लिया और बोली, जैसे जैसे मैं बोलूं करते रहना। मैंने हाँ में बोला। उसने कहा मेरी सलवार खोलो और उतारो। मैंने वैसा ही किया। फिर उसने अपना सूट उतारने को कहा, मैंने वो भी उतार दिया। अब वो पूरी तरह नंगी मेरे सामने थी और मेरा लंड फटने को हो रहा था जैसे कोई लोहे की रॉड हो। फिर उसने मेरी टी-शर्ट भी उतार दी और मेरे लंड को पकड़ के बोली इसे चूसना है।
मैं चुप था और उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया और मुझे गुदगुदी हो रही थी, पर थोड़ी देर में मज़ा आने लगा। 5 मिनट लंड चूसने के बाद वो बेड पर पैर फैलाकर लेट गई और बोली अपने लंड को मेरी चूत पर लगाओ और धीरे से धक्का मारो। मैं बहुत उत्तेजित था, मैंने अपना लंड उसकी चूत पर लगाया और धक्का मारा। चूत टाइट थी, जैसे ही लंड अंदर घुसा उसकी चीख निकल गई और वो बेहोश हो गई।
मैं डर गया और लंड को बाहर खींच लिया और उसे होश में लाने की कोशिश करने लगा। थोड़ी देर में उसे होश आया, मैंने पूछा क्या हुआ, तो उसने कहा तुम्हारा बहुत मोटा है, अब डालो फिर से और रुकना मत चाहे कुछ भी हो जाए। मैंने हाँ बोला और फिर से लंड उसकी चूत पर लगाया और धक्का मारा। उसका दर्द से बुरा हाल था, मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था।
तो उसने मुझे जोर का एक धक्का मारा और पूरा अंदर घुस गया उसने मुझे
बहुत जोर से बाहों में दबा लिया और उसकी टांगें कांप रही थीं अब मैं
चुदाई के लिए तैयार था फिर क्या था मैं शुरू हो गया स्पीड से धक्के
मारने लगा और वो सिसकियां भरने लगी आह आह आह उई मां मर गई और
मैं बिना रुके धक्के मारता जा रहा था पानी निकलने का नाम ही नहीं ले
रहा था
और वो हर 2 मिनट में झड़ जाती थी, वो 5 या 6 बार झड़ चुकी थी और मेरा पेट भी दुखने लगा पर पानी निकल ही नहीं रहा था। वो बोलने लगी, “अब तुम अपना पानी निकाल लो।” मैं बोला, “कैसे निकालूं?” तो वो हँसी और अपनी टांगों को मेरी कमर पर लपेट कर और मेरे होठों को अपने होठों में लेकर बोली, “अब करो।” मैं करने लगा, फुल स्पीड से धक्के मारता रहा, पता नहीं क्यों पानी निकलने का नाम ही नहीं ले रहा था। अब तो वो भी थक चुकी थी और बोलने लगी, “कैसे निकलेगा तुम्हारा पानी?”
दोस्तों आपको कहानी कैसी लगी? मिलते हैं अगले भाग में यह कहानी आप antarvasnahub.com पर पढ़ रहे हैं.
Click the links to read more stories from the category XXX Kahani or similar stories about antarvasna hindi story, Chudai Ki Kahani, hindi antarvasna, hindi sex, Hindi sex story