Maine apni hi bahan ko chod diya (मैंने अपनी ही बहन को चोद दिया) मेरी बहन रुबी को +2 के एडमिशन के सिलसिले में जबरदस्त चोदा और उसको अपना रखैल बनाया। साथ अपने दोस्तों को भी चुदाई में शामिल किया।
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Hello! मेरा नाम रोहित है और मैं 20 साल का हूँ। मैं देसी कहानी का रेगुलर रीडर हूँ, जिसके कारण मेरा सेक्स पर नज़रिया दूसरा हो गया है। ये मेरा पहला कहानी है जो कि मेरे और मेरी बहन की दरमियान है। मेरे घर में 4 मेंबर हैं। पापा, मम्मी, एक बहन और मैं। पापा गवर्नमेंट जॉब करते हैं और मम्मी हाउसवाइफ हैं।
बहन का नाम रूबी है। उसकी चढ़ती जवानी के साथ उसका बदन बिल्कुल मेरे दिमाग में छप गया है। क्या बताऊँ, क्या लड़की है वो। एकदम मस्त गश्ती जैसी लगती है, बिल्कुल माल, उसके मस्त गार, 34-28-36 की फिगर, सोचते ही मेरा लौड़ा खड़ा हो जाता है। चलो अब कहानी में आता हूँ। यह कहानी तब की है जब रूबी को कॉलेज में एडमिशन करवाना था। पापा की सरकारी नौकरी होने के कारण वे शहर नहीं जा सकते थे इसलिए उन्होंने मुझे साथ जाने को कहा।
मैं उसी दिन से रूबी को छोड़ने के सपने देखने लगा। पापा के एक दोस्त शहर में थे और हमारे रहने का सारा इंतज़ाम वहाँ कर दिए। हम भाई-बहन उन्हें नहीं जानते थे इसलिए पापा ने एक दिन की छुट्टी लेकर हमारे साथ जाने का फैसला किया। बस सुबह 8 बजे निकलना था। रुबी ने उस दिन सफेद रंग का नेट टॉप पहना था जो जाँघों तक था, जिसमें से उसकी ब्रा साफ नजर आ रही थी, और नीचे टाइट शॉर्ट पैंट पहनी थी जिसके कारण गांड बिल्कुल निकली थी। मेरा तो लौड़ा देखते ही खड़ा हो गया।
दिल तो कर रहा था कि साली को अभी छोड़ दूँ। पर देर ही सही, आखिर मैं उसके सील तोड़ने का प्लान कर चुका था। पापा पीछे की सीट में बैठे और हम भाई-बहन आगे साथ बैठ गए। रास्ते पर बस में चक्कर आने के कारण रूबी मेरे गोद में सिर रखकर सो गई। उसी की छाती मेरे जाँघ को टच कर रही थी। मेरा तो दिमाग खराब हो रहा था। शाम को 5 बजे के करीब हम वहाँ पहुँचे। वहाँ पापा के दोस्त हमें लेने आ गए। वो भी रूबी को देखकर दंग रह गए।
उनकी नज़रों से साफ-साफ वासना दिखाई दे रही थी। फिर हम उनके घर चले गए। अंकल ने हमारे लिए गेस्ट रूम में 2 बेड लगवाए। एक पापा के लिए और दूसरा रूबी और मेरे लिए। रात को खाना खाकर हम सब सोने चले गए।
पापा अपने बेड पर थे और मैं और रुबी अपने बेड पर। रुबी को नींद लग रही थी इसलिए उसने कहा कि भैया, मैं सो रही हूँ। मैंने भी कहा ठीक है, सो जाओ। साथ लेटते ही उसके बदन की खुशबू से मेरा लौड़ा खड़ा हो गया था। फिर मैं सोने की एक्टिंग करने लगा। मेरा तो पहले से ही दिमाग में था कि रुबी को कैसे चोदूँ, और जब साथ एक ही बिस्तर में इतनी हसीन माल लेटी हो तो किसी को कोई और ख्याल आए भी कैसे। पापा थकने के कारण तुरंत ही सो गए।
मैं रुबी के सोने का इंतज़ार करने लगा। फिर तकरीबन 2 घंटे बाद मुझे मौका मिला। रुबी ने फ्रेश होकर रात के लिए हल्के लाल रंग का टॉप और नीचे ढीला पजामा पहन लिया था। रुबी मेरी तरफ पीठ करके सो रही थी। मैं धीरे से रुबी से चिपक गया। क्या बताऊँ, मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था। पर रुबी के शरीर की गरमी मुझे पागल कर रही थी। मैंने हिम्मत करके अपना दाहिना हाथ उसके गांड के ऊपर रख दिया। रुबी ने कोई रिस्पॉन्स नहीं किया।
फिर मुझे लगा वो पूरी तरह सो गई है। मेरा हिम्मत बढ़ा, फिर मैं उससे चिपक गया जिससे मेरा लौड़ा रुबी के चूतड़ से टच हो गया। मेरा लौड़ा पूरा तनकर अंडरवियर फाड़कर निकलने लगा था। फिर मैं धीरे से रुबी की बूब्स में हाथ रखा और सहलाने लगा। वो धीरे से हिली, मैं डर गया, पर वो उठी नहीं।
मैं सहलाता रहा। अब तक मुझे पता चल गया था कि रूबी सोई नहीं है, बल्कि वह भी मज़े ले रही है। अब मेरा डर बिल्कुल खत्म हो गया। मैं रूबी को पीछे से उसके गले को चूमने लगा, साथ ही अब मैं उसके बूब्स को कपड़ों के ऊपर से जोर से दबाने लगा। रूबी गहरी साँसें लेने लगी थी। मुझे पता चल गया था कि मेरे लिंग के स्पर्श उसे भी अच्छे लगने लगे हैं।
मैंने धीरे से अपना अंडरवियर नीचे किया और रूबी के हाथ में रख दिया। रूबी अब मेरा लंड सहला रही थी। मुझे बड़ा मज़ा आने लगा। अब मैंने अपना हाथ उसके टॉप के अंदर डाल दिया। क्या बताऊँ, क्या मखमल की तरह सॉफ्ट थीं उसकी चूचियाँ। मैंने कभी अपने सपनों में भी नहीं सोचा था कि रूबी मुझसे इतनी आसानी से चुदेगी।
फिर मैंने हाथ उसके पाजामे के ऊपर से चूत सहलाना शुरू कर दिया। रुबी बिल्कुल गरम हो गई थी। और मेरा साथ देने लगी थी। फिर मैंने हाथ अंदर सलवार के अंदर घुसा दिया। रुबी बिल्कुल गीली हो चुकी थी। उसके चूत से लार टपक रही थी, मेरा लौड़ा अंदर लेने के लिए। मैंने पहले एक उंगली उसके चूत में उतार दी। वो मचल उठी और कहने लगी, भैया ज़रा धीरे से।
मैंने कहा, तू डर मत। आज तुझे धीरे ही चोदूंगा। मैं उंगली धीरे से आगे-पीछे करने लगा। और रूबी धीमी सिसकियाँ लेने लगी। मैं डर गया कहीं पापा को न पता चल जाए कि भाई-बहन का रास लीला चल रही है। मैंने रूबी को अपने तरफ घुमाया। मैंने रूबी के मुँह को अपने मुँह में ले लिया ताकि उसकी सिसकियाँ न निकलें।
अब मैंने उसकी सलवार नीचे खींच दिया और उसे नीचे नंगा कर दिया। उसकी चूत बिल्कुल गुलाब के पंखों की तरह छूने में महसूस हो रही थी। मैं धीरे से दो उंगली डालने लगा। फिर वह कहने लगी कि भैया अब बर्दाश्त नहीं होता। ये लौड़ा मेरी चूत में उतार दो। मैंने उससे पूछा कि तू पहले कभी चुदी है। फिर उसने कहा कि हाँ, एक बार मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे चोदा है। यह सुनकर मैंने पूछा कि क्या वह अभी भी उसे चोदता है, उसने कहा कि उसका ब्रेकअप हो चुका है।
फिर मैं और ज़ोर से उंगली करने लगा। और कहा क्यों, तू तो गस्ती है। क्या मेरा लौड़ा ले पाएगी। भैया ज़रा धीरे करना। वो फिर से कहने लगी कि भैया मुझे दर्द हो रहा है, ज़रा धीरे करो। अब मैंने रूबी की पैर अपने ऊपर रखा और लौड़ा रूबी के चूत में रखा, धीरे से धक्का दिया। रूबी मचल उठी और मुझे ज़ोर से बाहों में जकड़ लिया। अब मैं धीरे से लौड़ा आगे-पीछे करने लगा ताकि कोई शोर न हो। साथ उसकी चूची भी दबा रहा था।
रूबी इतनी गरम हो चुकी थी कि अब वह एक वेश्या की तरह अपनी गांड आगे-पीछे करके चुदवा रही थी। तकरीबन 20 मिनट तक मैं रूबी को उसी पोज़िशन में चोदता रहा। इस दौरान रूबी 2 बार चरम पर पहुँच चुकी थी। रूबी बिल्कुल थक चुकी थी पर मेरा लौड़ा और मांग रहा था। अब मैंने अपनी स्पीड बढ़ाई। फिर उसी पोज़िशन में मैंने रूबी की चुत में सारा वीर्य डाल दिया। फिर रूबी से पूछा कि मज़ा आया। उसने बताया कि इस तरह कभी उसे किसी ने नहीं चोदा है। फिर हम सो गए।
आप यह कहानी antarvasnahub.com पर पढ़ रहे हैं। बाकी अगली कहानी में कैसे मैंने रुबी के एडमिशन होने तक कैसे चोदा और फिर उसे अपने 2 दोस्तों से भी चुदवाया। अगर आपको यह कहानी पसंद आए तो मुझे er.rohitchy@gmail.com पर कमेंट जरूर भेजें। उम्मीद है आपको यह कहानी पसंद आई होगी।
अगर आपको मेरी “मैंने अपनी ही बहन को चोद दिया” कहानी अच्छी लगी तो कमेंट करके ज़रूर बताना, मिलते हैं अगले पार्ट में।
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